Kata Rahul - Sarthak 18 tahun ternyata lebih pintar dari CBI: Sarthak membeberkan kejanggalan di portal OSM CBSE, ini kemenangan generasi muda.
📖 Sumber artikel — 🇮🇳 Hindiकांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को CBSE स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का 8.15 मिनट का वीडियो अपने X अकाउंट पर शेयर किया। दोनों की मुलाकात 2 जून को दिल्ली में हुई थी। 18 साल के सार्थक सिद्धांत ने CBSE की 12वीं क्लास के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और OSM का काम करने वाली कंपनी COEMPT से जुड़ी टेंडर प्रोसेस में गड़बड़ी का खुलासा किया है। राहुल ने कहा कि देश का 18 साल का युवा CBI से तेज निकला, नौजवानों की ये जीत सही मायने में सरकार की हार है। झारखंड के रांची के रहने वाले सार्थक ने भी इस साल 12वीं के एग्जाम दिए थे। नंबर कम आने पर उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए अपनी स्कैन की गई आंसरशीट मंगाई थीं। गलत नंबर कटने और दूसरी परेशानियों को सार्थक ने सोशल मीडिया पर शेयर था। सार्थक CBSE में सुधार के लिए संसद की स्थायी समिति के सामने 500 पेज की प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं। राहुल और सार्थक की बातचीत का वीडियो अब पढ़िए राहुल और सार्थक की बातचीत… राहुल: यह अच्छा है या बुरा, आप इस पर क्या सोचते हैं। सार्थक: मैंने वही किया जो नागरिक को किसी भी चीज को लेकर करना चाहिए। ये हमारा देश है हर किसी में इतना सिविक सेंस जरूर होना चाहिए कि चीजों को पढ़कर सिस्टम को ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए काम करे। चाहें कितनी भी गड़बड़ी हो, लेकिन सुधार के लिए काम करना चाहिए। राहुल: जो हुआ, उसके बारे में आप क्या सोचते हैं? सार्थक: निसर्ग अधिकारी एथिकल हैकर है। उसने मुझे ग्रुप चैट पर OSM पोर्टल की गड़बड़ी शेयर की। मैंने देखा तो पाया कि उसमें सबकुछ ऑनमार्क द्वारा किया गया था। ऑनमार्क OSM इवैल्यूएशन के लिए एडटेक सॉल्यूशन कंपनी है। मैंने इसके बारे में और पता लगाया। निसर्ग ने मुझे दूसरी यूनिवर्सिटीज की भी डिटेल भेजी, जो ऑनमार्क का यूज करती थीं। उनमें भी गड़बड़ी दिखी। इसके बाद मुझे लगा कि सीबीएसई क्यों ऐसी कंपनी का यूज कर रही है, जिसके साथ इतनी गड़बड़ियां जुड़ी हैं। राहुल: 18 साल का लड़का लूपहोल ढूंढ सकता है, तो ये बड़ा सिस्टम क्यों नहीं? सार्थथ: मुझे लगता है कि ये लोग अपना काम जिम्मेदारी से नहीं कर रहे हैं। 3 बार टेंडर बदला गया, रुल्स बदले गए, इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट COEMPT एडुटेक को दिया गया। गड़बड़ी की बात सामने आने पर भी जांच नहीं की गई, रुल्स बार-बार बदले गए। हो सकता है कि उन्हें (CBSE) को कंपनी ज्यादा पसंद हो या उन्हें हम 17 लाख स्टूडेंट्स के फ्यूचर की चिंता नहीं हो।
राहुल: आप इतने जिज्ञासु कैसे हैं, देश का एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट्स में जिज्ञासा को मार रहा है। सार्थक: मुझे लगता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट्स में जिज्ञासा को मार रहा है। मुझे ये इसलिए है क्योंकि मेरे माता-पिता दोनों ही कंप्यूटर इंजीनियर रहे हैं। मैंने CBSE के सभी 576 टेंडर खंगाले। GEM पोर्टल भी खंगाला, वहां कुछ नहीं मिला। इसके बाद गूगल से जानकारी जुटाई। COEMPT को टेंडर देने से पहले 2 बार टेंडर कैंसिल किया गया। OSM सिस्टम लाने के केवल 74 दिन पहले ही ये टेंडर कंपनी को दिया गया। 1 जून: राहुल गांधी ने CBSE छात्रों से बात की राहुल गांधी ने CBSE 12वीं क्लास के छात्रों से मुलाकात की थी। उन्होंने बातचीत का 1.30 मिनट का वीडियो पोस्ट किया था। कैप्शन में लिखा- जिन साहसी युवाओं ने CBSE और मोदी सरकार से आसान सवाल पूछे, उन्हें जवाब की जगह अपमान मिला। वीडियो में छात्रों ने राहुल से कहा था कि आंसर शीट को लेकर सवाल पूछने पर हमें एंटी-नेशनल, डीप स्टेट एजेंट्स (जासूस), आतंकवादी और पाकिस्तानी कहा गया। राहुल ने हंसते हए कहा- 17 साल के डीप स्टेट एजेंट्स। राहुल से जिन छात्रों से बात की, उनमें वेदांत भी शामिल थे। वेदांत की एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि री-इवैल्यूएशन के दौरान पोर्टल पर उनकी फिजिक्स कॉपी की जगह किसी और की कॉपी अपलोड की गई थी। वेदांत के बाद कई अन्य छात्रों ने भी ऐसी शिकायतें कीं। राहुल बोले- PM आम पर बोलते हैं, छात्रों के लिए समय नहीं राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत का वीडियो पोस्ट करने के करीब 6 घंटे बाद एक और पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था आज सुबह प्रधानमंत्री के पास आमों पर बात करने का समय था, लेकिन उन 18. Tidak ada waktu untuk berbicara tentang 5 lakh siswa. Rahul menuduh salinan siswa dipindai dengan ponsel. Katanya- Dalam tender CBSE Mei 2025, ada syarat untuk memindai lembar jawaban dengan pemindai robot otomatis dengan kualitas 300 DPI. Namun dalam tender baru yang dikeluarkan pada bulan Agustus, ketentuan tersebut dihilangkan dan kualitas pemindaian diturunkan dari 300 DPI menjadi 200 DPI. 27 Mei: Rahul mengajukan pertanyaan tentang perusahaan yang melakukan pekerjaan OSM. Rahul Gandhi juga mengajukan pertanyaan tentang COEMPT, perusahaan yang melakukan pekerjaan OSM. Ia mengatakan, perusahaan COEMPT yang diberi kontrak oleh CBSE untuk evaluasi ujian digital, sebelumnya bernama Globarina. Rahul mempertanyakan kenapa kontrak CBSE diberikan kepada COEMPT dan atas saran siapa. Aturan dan prosedur manakah yang dilewati dan kontrak diberikan kepada perusahaan ini? COEMPT sebelumnya terlibat kontroversi dengan nama Globarina, mengapa CBSE tidak mengetahui hal ini? Apa hubungan antara manajemen COEMPT dan pemerintahan Modi. 27 Mei: CBSE mengatakan- Kontrak diberikan kepada perusahaan sesuai aturan. Namun CBSE membantah tudingan Rahul. Dalam pernyataan yang dikeluarkan oleh Kantor Pusat CBSE, dikatakan bahwa semua Peraturan Umum Final dan prosedur yang ditentukan telah diikuti dalam pemberian kontrak kepada COEMPT Edutech. Tuduhan tersebut tidak benar, menyesatkan dan tidak berdasarkan fakta. CBSE mengatakan bahwa ini membuat pemeriksaan menjadi lebih cepat dan akurat serta mengurangi kesalahan dalam penambahan tanda atau entri data. Setelah hasilnya, yang terjadi justru sebaliknya. Siswa mengeluh tentang server down, kegagalan pembayaran dan halaman kabur. COEMPT dituduh melakukan penyimpangan dalam Ujian Dewan Telangana. COEMPT Edutech adalah perusahaan yang berbasis di Darabad, Telangana. Perusahaan ini melakukan pekerjaan evaluasi digital di negara bagian seperti Telangana, Karnataka, dan Benggala Barat. Pada tahun 2019, namanya adalah Globarena Technologies Pvt. Ltd Kemudian didakwa melakukan penyimpangan dalam pengolahan data pada ujian dewan ke-12 di Telangana. Pada tahun itu, lebih dari 3 lakh dari 9,74 lakh anak-anak di negara bagian tersebut mengalami kegagalan. --------------------------------- Baca juga berita ini... Orang tua mencapai Mahkamah Agung menentang kebijakan tiga bahasa CBSE, menentang penerapannya di kelas 9. Kebijakan tiga bahasa CBSE ditentang di Mahkamah Agung oleh sekelompok 19 orang. Ini termasuk siswa, orang tua dan guru. Petisi ini diajukan terhadap penerapan kebijakan tiga bahasa di kelas 9. SC akan mendengarkan keberatannya minggu depan. Baca berita selengkapnya…
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