आजीवन कारावास की सजा काटने के बाद 45 साल बाद बरी कर दिया गया; 1977 में हत्या, 1981 में सजा, 2026 में क्लीन चिट
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
सुप्रीम कोर्ट ने 49 साल पुराने हत्या के मामले में तीन जीवित आरोपियों को बरी कर दिया। यह फैसला आरोपियों द्वारा आजीवन कारावास की सजा काटने के बाद आया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले और गवाहों की गवाही में गंभीर खामियां पाईं। गवाहों के बयानों में विसंगतियों के कारण संदेह का लाभ दिया गया। अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपराध स्थापित करने में विफल रहा, जिसके कारण बरी कर दिया गया।