अगर आरोप पत्र दायर किया गया लेकिन आरोपी को नहीं दिया गया तो डिफ़ॉल्ट जमानत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि कोई आरोपी केवल इसलिए डिफ़ॉल्ट जमानत का दावा नहीं कर सकता क्योंकि आरोपपत्र की प्रतियां वैधानिक समयसीमा के भीतर प्रदान नहीं की गईं थीं। न्यायमूर्ति संजय करोल और एनके सिंह ने स्पष्ट किया कि डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार तभी उत्पन्न होता है जब आरोपपत्र निर्धारित 60 या 90 दिनों के भीतर दायर नहीं किया जाता है।