'बातें हैं, बातों का क्या': क्यों भारत-पाकिस्तान ट्रैक II, III, IV... कूटनीति एक लूप पर गाना है
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
शांति के लिए नए सिरे से बातचीत का आग्रह करने वाले प्रमुख भारतीय और पाकिस्तानी नागरिकों के हालिया खुले पत्र को एक कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है। लेख में तर्क दिया गया है कि भारत-पाकिस्तान संबंध बैठकों की कमी के कारण नहीं, बल्कि गहरे वैचारिक, राजनीतिक और संस्थागत विभाजन के कारण रुके हुए हैं। पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के पास वास्तविक शक्ति है, जिससे नागरिक नेतृत्व वाली वार्ता संभावित रूप से निरर्थक हो गई है।