संघीय सरकार सुधार पैकेज के जरिए खस्ताहाल स्वास्थ्य प्रणाली को वापस पटरी पर लाना चाहती है। लेकिन जैसे-जैसे खर्च बढ़ रहा है, वैधानिक स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अधिक बचत चाहती हैं, जो मरीजों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।