Ketakutan akan serangan drone terhadap sasaran-sasaran utama negara ini: Pusat memerintahkan badan-badan keamanan untuk meningkatkan keamanan; Penerapan sistem anti-drone dimulai
📖 Sumber artikel — 🇮🇳 Hindiकेंद्र सरकार ने चेतावनी दी है कि सीमाओं पर मौजूद हमारे महत्वपूर्ण ठिकानों पर दुश्मन ड्रोन हमला कर सकता है। ‘द हिंदू’ की खबर के मुताबिक, जहाज और जलमार्ग मंत्रालय के समुद्री सुरक्षा विंग ने जमीन और समुद्री सीमाओं के पास मौजूद महत्वपूर्ण संपत्तियों और ठिकानों पर ड्रोन अटैक को लेकर अलर्ट जारी किया है। मंत्रालय के जारी पत्र में लिखा है… हमें जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने होंगे और खासकर सीमा के पास बने अपने ठिकानों को इन खतरनाक ड्रोनों से बचाने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने होंगे। दुनिया के मौजूदा हालातों को देखकर यह साफ है कि दुश्मन के ड्रोन हमारे जरूरी ठिकानों के कामकाज को ठप कर सकते हैं। इस चेतावनी के बाद सुरक्षा एजेंसियां देशभर के खास ठिकानों को सुरक्षित रखने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम लगाने में जुट गई हैं। ट्रायल शुरू, BSF-CISF ने टीम बनाई गृह मंत्रालय ने भी सीमा सुरक्षा बल के तहत एक खास कमेटी बनाई है। इस कमेटी का काम भारत के लिए सबसे अच्छे एंटी-ड्रोन सिस्टम को जांचना और पास करना है। सूत्रों ने बताया कि BSF पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के इलाकों में इन सिस्टमों को लगाने की तैयारी कर रही है, और इसके लिए बकायदा ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने भी एक टीम बनाई है। इस टीम में रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), एयरपोर्ट अथॉरिटी (AAI) और BSF के अधिकारी शामिल हैं, जो देश के महत्वपूर्ण ठिकानों का दौरा कर रहे हैं। इस टीम की रिपोर्ट और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही तय होगा कि किस ठिकाने पर कौन सा एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया जाएगा। तमिलनाडु में देश का पहला पोर्ट जहां एंटी-ड्रोन सिस्टम तमिलनाडु के थूथुकुडी में वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट मौजूद है। पोर्ट की सिक्योरिटी के लिए फरवरी 2026 में यहां एडवांस एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया गया। ऐसा सिस्टम अपनाने वाला यह देश का पहला पोर्ट है। इसके लिए बंदरगाह ने सरकारी कंपनी 'सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड' के साथ एक समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत रेडियो फ्रीक्वेंसी और रडार पर आधारित एक ऐसा सिस्टम लगाया जा रहा है, जो न सिर्फ दुश्मन के ड्रोन को पहचान लेगा बल्कि उसे जैम (ठप) भी कर देगा। यह सिस्टम बंदरगाह के माहौल के हिसाब से तैयार किया गया है जो चारों तरफ (360-डिग्री) नजर रखेगा। यह कदम देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार के 'अमृत काल विजन 2047' और 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' के लक्ष्यों के तहत उठाया गया है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तानी ड्रोन तबाह किए थे 6-10 मई 2025 के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इंडियन एयरफोर्स के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम्स ने पाकिस्तान के ड्रोन्स और फाइटर जेट्स को हवा में ही निशाना बनाया था। सुदर्शन मिसाइल सिस्टम के जरिए लगभग 300 किलोमीटर दूर उड़ रहे एक हाई-वैल्यू एयरक्राफ्ट को भी मार गिराया गया था। इसके अलावा, राफेल और सुखोई-30 ने पाकिस्तानी सेफ सेंटर (हैंगर) को निशाना बनाया, जिसमें मेड इन चीन विंग लूंग ड्रोन तबाह हुए थे। …………… यह खबर भी पढ़ें…. भारतीय सेना को मिले 106 कामिकाजे ड्रोन: 180 किमी की रेंज, 450kmph की रफ्तार; न जैमिंग का असर, न टारगेट से भटकेंगे भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्वदेशी रक्षा कंपनी SMPP ने सेना को 106 टर्बोजेट इंजन से चलने वाले ‘कामिकाजे’ ड्रोन सौंप दिए हैं। इन्हें ‘पीसकीपर (अग्निवेग)’ नाम दिया गया है। यह ड्रोन 180km की रेंज तक हमला कर सकते हैं। साथ ही 450kmph की रफ्तार पकड़ सकते हैं। यानी इसकी रफ्तार दुनिया में सबसे तेज उड़ने वाले पेरेग्रिन फाल्कन पक्षी की रफ्तार 320kmph से भी ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें… 'नागास्त्र' के बाद एंटी-ड्रोन सिस्टम बना रही भारतीय कंपनी: फाउंडर बोले- ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुआ 'नागास्त्र'; अब ह्यूमनॉइड रोबोट बनाएंगे, -40°C में तैनात होगा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस स्वदेशी वेपनाइज्ड ड्रोन ‘नागास्त्र’ ने दुश्मन की साजिश को नाकाम किया, उसे सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने बनाया है। अब यह कंपनी वेपनाइज्ड डॉग रोबोट और इंसानों जैसा दिखने वाला ‘ह्यूमनॉइड रोबोट’ भी बना रही है। पूरी खबर पढ़ें…
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