Kartu Aadhaar sebaiknya digunakan hanya untuk identifikasi: Sidang di Mahkamah Agung hari ini; Klaim dalam petisi – Alamat dan tanggal lahir saat ini sedang dipertimbangkan sebagai bukti.
📖 Sumber artikel — 🇮🇳 Hindiसुप्रीम कोर्ट आज आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान पत्र से आगे बढ़कर नागरिकता, निवास और जन्म तारीख के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका नागरिकता और पहचान का भ्रम में मांग की गई है कि आधार कार्ड के इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि तक सीमित करने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जन्म तिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार का इस्तेमाल, आधार एक्ट 2016 की धारा 9, RPA 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ माना जाए। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता के 2 तर्क घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को आसानी से मिल रहे दूसरे दस्तावेज आधार का इस्तेमाल स्कूलों में एडमिशन, संपत्ति खरीदने, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसी प्रक्रियाओं में उम्र, नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है। याचिका में दावा किया गया है कि इसी वजह से घुसपैठिए और अवैध प्रवासी भी आधार के आधार पर अन्य दस्तावेज हासिल कर रहे हैं। वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेशन पर भी सवाल उठाए याचिकाकर्ता ने वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका के अनुसार फॉर्म-6 के तहत दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं है और इससे ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं जिनके पास जरूरी वैध दस्तावेज नहीं हैं। याचिका में चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन ढांचे में व्यापक सुधार की मांग की गई है। इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाए जाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार वैध, लेकिन सीमाओं के साथ सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से आधार अधिनियम को संवैधानिक माना, लेकिन कुछ प्रावधान रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा बैंक खाते से, मोबाइल सिम से आधार लिंक करना अनिवार्य नहीं। स्कूल एडमिशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं। लेकिन सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं में आधार का उपयोग वैध है। जानिए आधार अधिनियम क्या है आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 वह कानून है जिसके तहत आधार संख्या जारी करने, उसके उपयोग, डेटा की सुरक्षा और UIDAI के कामकाज का कानूनी ढांचा तय किया गया। यह कानून 26 मार्च 2016 को लागू हुआ था। अधिनयिम में यह बात स्पष्ट की गई है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार केवल यह दर्शाता है कि व्यक्ति भारत का निवासी है। देश में आधार कार्ड सरकारी और अन्य सर्विस में जरूरी ……………….. यह खबर भी पढ़ें… आधार कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा: फोटोकॉपी से होने वाले मिसयूज रोकने UIDAI बना रही नियम, दिसंबर से हो सकते हैं लागू
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार कार्ड नए सिरे से डिजाइन करने पर विचार कर रहा है। भविष्य में आधार कार्ड केवल धारक की फोटो और QR कोड वाला हो सकता है। यानी कार्ड पर आधार नंबर, नाम-पता, जन्मतिथि अन्य बायोमीट्रिक जानकारी नहीं होंगी। पूरी खबर पढ़ें…
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