कुछ लोग इस फ़ैसले को भोपाल और मालवा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे देश के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण सेनानी की विरासत को कमज़ोर करने की कोशिश बता रहे हैं.