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التأثير الكبير لتحقيقات بهاسكار، تمت إزالة اثنين من مقدمي خدمات التوزيع: تم إرسال PHQ إلى Lokayukta، اقتراح التعليق؛ إجراءات صارمة في 7 حتى الآن

التأثير الكبير لتحقيقات بهاسكار، تمت إزالة اثنين من مقدمي خدمات التوزيع: تم إرسال PHQ إلى Lokayukta، اقتراح التعليق؛ إجراءات صارمة في 7 حتى الآن

دولي 04/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 29
⚡ الخلاصة في سطرين

दैनिक भास्कर डिजिटल पर पब्लिश लोकायुक्त कार्यालय में कथित तौर पर करप्शन की खबर का बड़ा असर हुआ है। भास्कर स्टिंग के कुछ घंटों के भीतर ही लोकायुक्त संगठन ने कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। लोकायुक्त के एडीजी योगेश देशमुख ने दोनों डीएसपी बीएम द्विवेदी और मंजू सिंह को लोकायुक्त से हटाकर पीएचक्यू अटैच कर दिया है। दोनों को सस्पेंड करने का प्रस्ताव भी पीएचक्यू को भेजा है। वहीं, बुधवार (3 जून) को एडीजी योगेश देशमुख के आदेश पर तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था। इनमें हेड कॉन्स्टेबल रामदास कुर्मी, आरक्षक गौरव साहू और प्रधान आरक्षक यशवंत सिंह ठाकुर शामिल हैं। इसके अलावा प्रधान आरक्षक बृज बिहारी पांडेय को निलंबन की कार्रवाई के लिए और संविदा वाहन चालक अमित विश्वकर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। एडीजी के आदेश में स्पष्ट रूप से दैनिक भास्कर में 3 जून 2026 को पब्लिश खबर का जिक्र करते हुए संदिग्ध गतिविधियों को कार्रवाई का आधार बताया गया है। साथ ही सभी संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विस्तृत जांच कर जल्द रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। भास्कर के खुलासे के बाद इन कर्मचारियों पर एक्शन अब जानिए भास्कर रिपोर्टर कैसे इन तक पहुंचा और कैसे करप्शन की परतें खोली आरोपियों के रिश्तेदार बनकर पहुंचा रिपोर्टर भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को लगातार यह शिकायत मिल रही थी कि लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारी ट्रैप मामलों में फंसे सरकारी कर्मचारियों को राहत दिलाने के नाम पर रकम की डील करते हैं। इन सूचनाओं की हकीकत जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने डेढ़ महीने तक पड़ताल की। सबसे पहले टीम ने हाल ही कुछ सालों में लोकायुक्त की ओर से दर्ज किए गए ट्रैप मामलों की जानकारी जुटाई। इनमें से ऐसे मामलों को चिन्हित किया गया, जिनमें सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे और जिनकी जांच पूरी नहीं हुई थी। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर ने आरोपियों के रिश्तेदार के रूप में अपनी पहचान बनाई। इसी पहचान के आधार पर लोकायुक्त के कर्मचारियों और अधिकारियों तक रिपोर्टर पहुंचा । बातचीत के दौरान रिपोर्टर ने यह जानना चाहा कि क्या पैसे देकर केस को प्रभावित किया जा सकता है। भास्कर की जिनसे डील हुई, वे पैसा देने का दबाव बनाने लगे लोकायुक्त के अफसरों और कर्मचारियों से डील की पूरी बातचीत कैमरे में कैद करने के बाद भास्कर रिपोर्टर ने उनसे न संपर्क किया और न ही रुपए पहुंचाए। इसके कुछ दिन बाद उन्होंने रिपोर्टर को कॉल और वॉट्सएप मैसेज करना शुरू कर दिया। अमित विश्वकर्मा ने मैसेज कर केस बिगाड़ने की धमकी तक दे दी। डीएसपी मंजू सिंह के रीडर गौरव साहू ने कहा कि दो लाख रुपए लोकायुक्त दफ्तर के बाहर आकर दे दो। इसके बाद रिपोर्टर के मोबाइल पर एक कॉल आया। जिसे डीएसपी मंजू सिंह का नंबर बताया जाता है। महिला ने रिपोर्टर से पूछा कि लेटर का जवाब कब तक दिलाओगे। जल्दी करवा दो तो प्रतिवेदन जल्दी तैयार होगा। दैनिक भास्कर एप पर ये खबरें पब्लिश हुई थीं… 3 जून को पब्लिश पार्ट-1 पढ़ें… एमपी लोकायुक्त के भीतर रिश्वतखोरी का सिस्टम कैमरे में कैद एमपी में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने वाले लोकायुक्त संगठन के भीतर ही रिश्वत लेकर केस कमजोर करने वाला नेटवर्क सक्रिय है। भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में दो कॉन्स्टेबल, एक टेक्नीशियन और एक रीडर कैमरे में रिश्वत की डील करते दिखे। पढ़ें पूरी खबर… 4 जून को पब्लिश पार्ट-2 भी पढ़ें… लोकायुक्त डीएसपी बोलीं- चोरी सब करते हैं...पकड़ा गया वो चोर ‘ऑपरेशन लोकायुक्त’ के पहले पार्ट में लोकायुक्त के टेक्नीशियन, आरक्षक और रीडर ट्रैप केस कमजोर करने के बदले रिश्वत मांगते कैमरे में कैद हुए थे। उन्होंने डीएसपी स्तर के दो अधिकारियों के लिए 3 से 5 लाख रुपए की रिश्वत डील की थी। टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा ने पूरी बातचीत में डीएसपी मैडम और डीएसपी सर का नाम लिया था। पढ़ें पूरी खबर…

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