यूनानी दार्शनिक गरीबी को केवल वस्तुओं से नहीं बल्कि इच्छा से देखने का प्रस्ताव करते हैं। इस पर एक चिंतन कि प्रचुरता हमेशा संतुष्टि क्यों नहीं लाती।