तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी बंगाल की राजनीति के लिए बारूद का ढेर क्यों है?
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
20 साल बाद तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर तीखी राजनीतिक चर्चा छिड़ गई है। उनकी यात्रा के संबंध में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ने अपनी कड़ी राय व्यक्त की। 2007 से निर्वासित, नसरीन इस अगस्त में एक कट्टरवाद विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने वाली हैं। उनके पिछले कार्यों और उनके निर्वासन की परिस्थितियों ने पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र भाषण और धार्मिक मान्यताओं के अंतर्संबंध के बारे में बातचीत के माध्यम से स्तब्ध कर दिया है।