सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अकेले कॉल रिकॉर्ड ठोस सबूत नहीं हैं, महिला को पति की हत्या से बरी कर दिया गया
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
शीर्ष अदालत ने 2007 के मामले में कहा कि महज टेलीफोन रिकॉर्ड पेश करने से अवैध संबंध के कारण हत्या के ठोस सबूत की जगह नहीं ली जा सकती।