वीणा के बिना देवी सरस्वती: पल्लव, चोल युग की मूर्तियां एक प्रारंभिक प्रतिमा-विज्ञान को प्रकट करती हैं
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
वीणा, जिसे आज सरस्वती की पहचान से अविभाज्य माना जाता है, ऐसा प्रतीत होता है कि बाद के काल में ही वह उनके प्रमुख प्रतीक के रूप में उभरी।