निजी बैंकों ने FY26 में लगभग आधे NPA को बट्टे खाते में डाल दिया, PSB को पीछे छोड़ दिया
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
पीडब्ल्यूसी इंडिया में जोखिम परामर्श, वित्तीय सेवाओं और ट्रेजरी के पार्टनर और लीडर कुंतल सूर ने कहा, "निजी बैंक अपनी बैलेंस शीट को सक्रिय रूप से साफ करने के लिए इन राइट-ऑफ और प्रोविजनिंग बफ़र्स का उपयोग करते हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आम तौर पर समग्र दीर्घकालिक या प्रणालीगत वसूली पर अधिक भरोसा करते हैं।" "असुरक्षित खुदरा ऋणों में आम तौर पर गिरावट देखी गई है जिससे बट्टे खाते में डालने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।"