विरोध से पता चलता है कि राजनेताओं के पास भाषा के मुद्दों में हस्तक्षेप करने की कोई वैधता नहीं है
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
एक विशेषज्ञ के रूप में, हमारे लेखक को वर्तनी सुधार तैयार करने में मदद करनी चाहिए। वह उनके कटु आलोचक बन गये। आज एक प्रधानमंत्री भी वर्तनी नियमों को अनावश्यक मानते हैं। यह उस समय सुधारकों द्वारा की गई घातक गलती को क्यों दोहराता है?