बिल्डर ने उस खरीदार को रिफंड करने का आदेश दिया जिसने 1995 में 25 लाख रुपये का भुगतान किया था लेकिन उसे कोई संपत्ति नहीं मिली
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग ने एक डेवलपर को 1995 में उन 11 वाणिज्यिक इकाइयों के लिए एकत्र किए गए 25 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है, जिनका निर्माण ही नहीं हुआ था। खरीदार, जो अपने व्यवसाय के लिए दुकानों का उपयोग करने का इरादा रखता था, ने कब्जे के लिए तीन दशकों तक इंतजार किया। आयोग ने बिल्डर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया, खरीदार को मानसिक पीड़ा के लिए 2 लाख रुपये और मुकदमेबाजी लागत के लिए 25,000 रुपये का मुआवजा दिया।