[मीडिया जगत] युवाओं के प्रति सम्मान की शुरुआत
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
समाजशास्त्री हॉवर्ड बेकर का कहना है कि लोग इस तरह से कार्य नहीं करते क्योंकि वे वैसे ही हैं, बल्कि उनका व्यवहार समाज द्वारा उन्हें दिए गए नाम के आधार पर बदल सकता है। जिस क्षण आप किसी चीज़ को वर्गीकृत और नाम देते हैं, लेबलिंग केवल एक विवरण नहीं बल्कि सामाजिक वास्तविकता बनाने का एक कार्य बन जाता है। '20 के दशक में पुरुष' और '20 के दशक में महिलाएं' सरल जनसांख्यिकीय वर्गीकरण हैं। यह अपने आप में कोई राजनीतिक समूह नहीं है.