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Tharoor şunları söyledi: Vande Mataram halk için külfetlidir: Her programda milli marşı söylemek zordur; Çözümü karşılıklı rızayla bulunmalı

Tharoor şunları söyledi: Vande Mataram halk için külfetlidir: Her programda milli marşı söylemek zordur; Çözümü karşılıklı rızayla bulunmalı

Uluslararası 02/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 30
⚡ Hızlı Özet

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी 6 छंदों को बजाने या गाना अनिवार्य करने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे गैर जरूरी और लोगों के लिए बोझिल बताया। केरल के तिरुवनंतपुरम में सोमवार को थरूर ने कहा, 'वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है। जब इसे गाया जाता है, तो हम सम्मान में खड़े हो जाते हैं। इसका पहला छंद या पहले दो छंद ज्यादातर लोगों को जुबानी याद होते हैं। थरूर ने बताया कि पारंपरिक रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता था तो वहीं राष्ट्रगान अलग से कार्यक्रम के आखिर में बजाया जाता था। थरूर ने कहा- वंदे मातरम सभी लोगों को याद नहीं आखिरकार इस मामले पर कोई फैसला लेना पड़ सकता है, क्योंकि संसद द्वारा पारित ऐसा कोई कानून नहीं है जो इसे अनिवार्य बनाता हो। मुझे राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे। बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। ‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था। ……………………..

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