1823 में इंग्लैंड में स्थापित एक साप्ताहिक सहकर्मी-समीक्षा चिकित्सा पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के टीके की बदौलत देश में लगभग 200 लोगों की जान बचाई गई थी।