रंगभेद अब वैश्विक हो गया है
📖 लेख स्रोत — 🇹🇷 तुर्कीआख़िरकार, नया रंगभेद दीवारों द्वारा स्थापित नहीं किया गया है, बल्कि अदृश्य तंत्र द्वारा स्थापित किया गया है जो जीवन के संचलन को नियंत्रित करता है। एक ओर, पूंजी, डेटा, खनिज और पानी के लिए असीमित आवाजाही; दूसरी ओर, मनुष्य के लिए सीमित गति, सीमित अधिकार, सीमित श्वास। वैश्विक व्यवस्था की सच्चाई यह है: अधिशेष मूल्य का उत्पादन परिधि में होता है, लेकिन जीवन की सुरक्षा केंद्र में संरक्षित होती है। इसीलिए रंगभेद अब वैश्विक हो गया है; पूंजी का क्रम आर्थिक, जैव-राजनीतिक और जैव-नस्लवादी दोनों है।
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