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ACB-قاضی در دستگیری ماهش جوشی اشتباه کرد: دادگاه عالی اعلام کرد - افسران پلیس و قضایی نیاز به آموزش دارند، حقایق دستکاری شد.

ACB-قاضی در دستگیری ماهش جوشی اشتباه کرد: دادگاه عالی اعلام کرد - افسران پلیس و قضایی نیاز به آموزش دارند، حقایق دستکاری شد.

بین‌المللی 18/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 13
⚡ خلاصه سریع

हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली उनके बेटे रोहित जोशी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हैबियस कॉर्पस) को खारिज कर दिया है। कोर्ट की जयपुर बेंच ने अपने आदेश में माना कि इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और विशेष न्यायाधीश के स्तर पर गंभीर चूक हुई है। जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने 12 जून को याचिका खारिज कर दी थी। विस्तृत आदेश बुधवार को अपलोड हुआ। इसमें खंडपीठ ने कहा है- गिरफ्तारी के आधार बताने के नियमों का पालन नहीं हुआ है। ACB और विशेष न्यायाधीश दोनों के स्तर पर गंभीर चूक हुई है। उधर, कोर्ट ने यह भी कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति न्यायिक आदेशों के तहत हिरासत में हो, तब हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए गिरफ्तारी को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाता है, लेकिन याचिकाकर्ता के पास विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को कानून के अनुसार चुनौती देने का विकल्प खुला है। ACB गिरफ्तारी के आधार और कारण का अंतर नहीं समझ पाई हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा- गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना संवैधानिक जरूरत है। ACB रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जिससे साबित हो कि महेश जोशी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार बताए गए थे। ACB ने केवल अपराध की धाराएं बताईं, जबकि गिरफ्तारी के आधार (ग्राउंड ऑफ अरेस्ट) और गिरफ्तारी के कारण (रीजन ऑफ अरेस्ट) अलग-अलग चीजें हैं। ACB गिरफ्तारी के आधार की मूलभूत अवधारणा को ही नहीं समझ पाई। ACB के बयानों में विरोधाभास कोर्ट ने कहा- पहले अपने जवाब में ACB ने कहा कि महेश जोशी को गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे। बाद में कहा कि उनके परिवार को आधार बताए गए थे। ये दोनों बातें विरोधाभासी हैं। कोर्ट ने कहा कि बाद में दाखिल जवाब में कई तथ्य जोड़े गए, जो प्रथम दृष्टया हेरफेर किए गए प्रतीत होते हैं। विशेष न्यायाधीश पर भी टिप्पणी की बेंच ने कहा- इस मामले में ACB के साथ-साथ ACB मामलों की विशेष अदालत के जज से भी गंभीर चूक हुई है। महेश जोशी की ओर से 7 मई को ही रिमांड के समय गिरफ्तारी की वैधता पर आपत्ति उठा दी गई थी। ऐसे में विशेष न्यायाधीश का यह दायित्व था कि वह उसी समय गिरफ्तारी की वैधता को जांचते, लेकिन उन्होंने आवेदन लंबित रखा और लगभग 31 दिन बाद उसे खारिज किया। पुलिस और जज को ट्रेनिंग की जरूरत बेंच ने कहा- प्रदेश की पुलिस और न्यायिक अफसरों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बारे में ट्रेनिंग की जरूरत है। इससे शुरुआती स्तर पर ही संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सही ढंग से पालन हो सके। बेंच ने आदेश की कॉपी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी है ताकि वे इसे मुख्य न्यायाधीश के सामने रख सकें। इसके अलावा आदेश की कॉपी एसीएस होम को भी भिजवाने के लिए कहा है जिससे कि निर्देशों का पालन हो सके। परिजनों को नहीं दी गई गिरफ्तारी की लिखित सूचना महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि मेरे पिता को 7 मई को जब गिरफ्तार कर कोर्ट में 5 दिन के पुलिस रिमांड के लिए पेश किया गया, तो नियमों की जमकर अनदेखी की गई। याचिका में दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य दिशा-निर्देशों के तहत गिरफ्तारी के आधारों की लिखित सूचना और उसकी रिसीप्ट परिजनों या उनके वकील को रिमांड मांगने से पहले नहीं दी गई थी। रोहित जोशी की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि लिखित सूचना के अभाव में यह गिरफ्तारी पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। इसलिए उनके पिता को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। ----- ये खबरें भी पढ़िए…

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