राज्यों और वैचारिक संगठनों के बीच टकराव अब केवल राजनीति और मीडिया के क्षेत्रों में नहीं होता है, बल्कि हाल के वर्षों में अर्थशास्त्र, निवेश और वित्त के क्षेत्रों में भी बढ़ गया है।