हर्विन को संदेह है कि अब तक इसी तरह के कई मामले दबाए रखे गए हैं और शांतिपूर्ण जबरदस्ती की प्रथा के कारण कभी भी कानून के दायरे तक नहीं पहुंच पाए हैं।