मुसलमानों की नज़र में मुहर्रम का महीना न केवल शोक का अवसर है, बल्कि उस विद्रोह की याद भी दिलाता है जिसमें इमाम हुसैन (अ.स.) ने ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़े होने को इस्लाम और दुनिया के इतिहास में एक स्थायी सिद्धांत में बदल दिया था।