"मेरी झूठी गवाही ने तीन किशोरों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और तब से अपराधबोध ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा"
📖 लेख स्रोत — 🇮🇷 फारसीरॉन बिशप का कहना है कि वह 1984 में 14 साल के थे जब पुलिस ने उन्हें एक हत्या के मुकदमे के दौरान गवाह के तौर पर झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया था। उनकी गवाही से तीन निर्दोष किशोरों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में मदद मिली।
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