Lluvia en 9 estados, incluido MP: el día más frío de junio en Delhi, el agua entró en las tiendas en Himachal, polvo en Rajasthan.
देश के 9 राज्यों में प्री मानसून एक्टिव है। एमपी समेत 9 राज्यों में बारिश हो रही है। दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार को बारिश और तेज हवाएं चलीं। अधिकतम तापमान सामान्य से 6°C तक कम दर्ज किया गया, जिससे यह जून का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विभाग ने 21 जून तक बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई है। वहीं राजस्थान के सीकर, बीकानेर में बारिश हुई। श्रीगंगानगर में धूल का गुबार छा गया। हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर गया। पानी और कचरा दुकानों में घुस गया। मानसून की बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ चुका है। हालांकि मानसून तेलंगाना के भद्राचलम में 6 दिन से अटका हुआ है। इस वजह से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बारिश में देरी हो गई है। नॉर्थ-ईस्ट में यह उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की बॉर्डर पर पहुंच चुका है। 4 जून को केरलम में दस्तक देने के बाद मानसून 13 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। मैप में देखिए, कहां तक पहुंचा मानसून राज्यों से मौसम की खबरें… 10 राज्यों में गर्मी का असर, पारा 40°C पार राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के कई शहरों में सोमवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दर्ज किया गया। यहां पारा 43°C रहा। वहीं यूपी के बांदा और प्रयागराज में 42.6°C, एमपी के खजुराहो 42.2°C, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.2°C और ओडिशा के बौध में 42.6°C रहा। अगले दो दिन के मौसम का हाल 18 जून: बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना। बिहार में कुछ जगहों पर 50-70kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। 19 जून: जेट स्ट्रीम कमजोर होने पर आगे बढ़ेगा मानसून मौसम विभाग के मुताबिक, जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न कमजोर होने पर मानसूनी हवाएं तेज होंगी। अगले 4-5 दिनों में मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन सकती हैं। जेट स्ट्रीम वायुमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली अत्यंत तेज हवाएं हैं। ये आमतौर पर पृथ्वी की सतह से करीब 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई होती है। ये मानसूनी बादलों और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ को प्रभावित करती हैं।