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قاضی بازنشسته درخواست زمان بیشتری برای ملاقات با وکلا کرد: جیریبالا گفت- روزنامه در زندان لازم است. خانواده Twisha را از بیانیه دادن به رسانه ها منع کنید.

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بین‌المللی 16/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 8
⚡ خلاصه سریع

एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और सास सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी गई है। इससे पहले रिमांड पूरी होने पर मंगलवार को दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के सामने पेश किया गया। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने कोर्ट से कहा कि जेल में उन्हें जो हिंदी और अंग्रेजी अखबार दिए जा रहे हैं, उनमें उनके केस से जुड़ी खबरें काटकर अलग कर दी जाती हैं। उन्हें पूरा अखबार पढ़ने को दिया जाए। साथ ही वकीलों से मुलाकात के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय-सीमा समाप्त की जाए। मामले की प्रकृति को देखते हुए कानूनी सलाह के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। गिरिबाला ने यह भी मांग रखी कि उन्हें बेटे समर्थ सिंह के साथ एक ही समय पर अपने वकीलों से मिलने की अनुमति दी जाए। इससे कानूनी रणनीति पर बेहतर समन्वय बन सकेगा। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि जांच अभी कई अहम बिंदुओं पर बाकी है। सीबीआई के अनुसार दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। परिवार और आरोपी पक्ष के रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाने हैं, वहीं ट्विशा के मोबाइल और लैपटॉप की डिजिटल फॉरेंसिक जांच दिल्ली स्थित सीएफएसएल में चल रही है। सुनवाई के दौरान गिरिबाला और समर्थ की ओर से ट्विशा के बैंक खाते, 7 लाख रुपए के खर्च, मोबाइल टावर लोकेशन और कार की चाबी से जुड़ी जांच की मांग की गई। कोर्ट इस आवेदन पर 27 जून को सुनवाई करेगा। वहीं बचाव पक्ष ने मीडिया ट्रायल का मुद्दा उठाया। अखबारों की उपलब्धता और वकीलों से मुलाकात का समय बढ़ाने की मांग भी रखी गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। हालांकि दवाइयों से जुड़े जब्ती पंचनामा उपलब्ध कराने के निर्देश सीबीआई को दिए गए हैं। ट्विशा की दवाइयों की जब्ती का मेमो भी मांगा गिरिबाला सिंह ने अदालत के सामने आपत्ति जताते हुए कहा कि ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं। इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर उन्हें सार्वजनिक बयान देने से बचने को कहा जाए। जांच के दौरान ट्विशा की दवाइयां जब्त की गई थीं, लेकिन जब्ती पंचनामा (मेमो) की कॉपी गिरिबाला या समर्थ के वकीलों को नहीं दी गई। ये दिलवाई जाए। सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए न्यायिक हिरासत बढ़ाने संबंधी आवेदन की कॉपी भी मांगी। कोर्ट के आदेश पर ये उनके वकीलों को दे दिए गए। CBI ने कहा- दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली ट्विशा पक्ष के वकील शुभांग दीक्षित ने कहा- सीबीआई ने अदालत को बताया कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक एजेंसी को नहीं मिली है। यह रिपोर्ट जांच से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ाने की मांग की। इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। गिरिबाला के कार्यकाल में नियुक्त वकीलों पर उठे थे सवाल इससे पहले 12 जून को ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमपीएसएलएसए) को शिकायत भेजकर कानूनी सहायता व्यवस्था (लीगल एड) से जुड़े वकीलों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए नियुक्त लीगल एड से जुड़े कुछ वकील गिरिबाला और समर्थ के पक्ष में सक्रिय हैं। इनकी नियुक्ति उस समय हुई थी, जब गिरिबाला सिंह भोपाल में जिला एवं सत्र न्यायाधीश थीं। नवनिधि शर्मा ने शिकायत के साथ एक फोटो भी भेजा, जिसमें लीगल एड डिफेंस काउंसिल योजना से जुड़े सहायक अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना, समर्थ सिंह की शादी में डांस करते दिखाई दे रहे हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान भी वे आरोपी पक्ष के निजी वकील के साथ अदालत में मौजूद थे। चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल की जांच कराने की मांग शिकायत में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि 2 जून को सीबीआई द्वारा आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के दौरान उन्होंने वकालतनामा पेश किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब आरोपी पक्ष के पास पहले से निजी अधिवक्ता मौजूद थे, तब लीगल एड से जुड़े वकीलों की सक्रिय भूमिका की जांच होना चाहिए। नवनिधि शर्मा का आरोप है कि गिरिबाला सिंह के कार्यकाल में नियुक्त दो लीगल एड वकील बाद में उन्हीं से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष के साथ दिखाई दिए। शिकायत में कहा गया है कि यदि लीगल एड पैनल से जुड़े सदस्य निजी पक्ष की पैरवी कर रहे थे तो इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। क्या हाेते हैं लीगल एड वकील लीगल एड वकील जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने वाले वकील होते हैं। इन्हें जिला, राज्य या राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किया जात است.

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