CBI berkata- Guru Pune mengatur makalah NEET: 3 terdakwa dalam tahanan yudisial hingga 15 Juni; SC mengatakan- Ujian ulang hanya akan dilakukan dalam mode pena-kertas
📖 Sumber artikel — 🇮🇳 HindiNEET पेपर लीक मामले में CBI ने सोमवार को कहा कि पुणे की एक मेडिकल एकेडमी में फिजिक्स फैकल्टी रहे हर्षदकुमार शाह ने क्वेश्चन पेपर अरेंज कराने में भूमिका निभाई थी। एजेंसी के मुताबिक, शाह ने फिजिक्स का प्रश्नपत्र मनीषा हवालदार तक पहुंचाया था। जांच में यही पेपर मनीषा के मोबाइल से बरामद हुआ। इसी मामले में गिरफ्तार डॉ. मनोज शिरुरे, हर्षदकुमार शाह और मनीषा हवालदार को सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। CBI ने अदालत को बताया कि डॉ. मनोज शिरुरे पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर से 5 लाख रुपए लिए थे। यह रकम उनकी बहन के घर से बरामद की गई थी। देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा हुई थी। 7 मई की शाम पेपर लीक की खबर सामने आई थी। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। 21 जून को री-एग्जाम होगा। सुप्रीम कोर्ट बोला- NEET री-एग्जाम पेन-पेपर मोड में ही होगी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NEET री-एग्जाम को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग खारिज कर दी। री-एग्जाम पेन-पेपर मोड में ही होगी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच RJD सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील ने NEET री-एग्जाम CBT मोड में कराने की मांग की। याचिका में 4 बड़े बदलावों की मांग संसदीय समिति में NTA की जगह नई संस्था का प्रस्ताव इधर संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की स्थायी समिति की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने की। इसमें NEET परीक्षा, NTA और पेन-पेपर बनाम CBT मोड पर चर्चा हुई। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने समिति ने कहा कि NEET से जुड़े सवाल केवल परीक्षा के तरीके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की विश्वसनीयता से भी जुड़े हैं। संगठन ने NTA को भंग कर संसद के कानून के तहत नई राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाने की मांग की। UDF ने यह भी कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक की जांच को 2024 की परीक्षा से जुड़े विवादों के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। संगठन ने पूरे मामले की समयबद्ध और पारदर्शी जांच की मांग की। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस ने एक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा विवादों ने देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि देश में 90 पेपर लीक की घटनाओं से 9 करोड़ से ज्यादा छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। NEET समेत कई राष्ट्रीय परीक्षाओं की साख पर सवाल खड़े हुए हैं। पेपर लीक मामलों ने परीक्षा माफिया और व्यवस्था के बीच गठजोड़ को उजागर किया है। NEET पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तार, 21 जून को परीक्षा NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटर्स में हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को होने का ऐलान किया। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। भी देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27000 से अधिक BDS सीटें हैं। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने NTA से पूछा-पिछली गलती से क्या सीखा:कोई सबक नहीं लिया, ये दुखद; NEET पेपर लीक पर केंद्र-CBI से भी जवाब मांगा सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- यह दुखद है कि NTA ने पहले हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि यह मामला 2024 में भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। तब एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने कई सिफारिशें दीं, जिन्ह Hal itu juga diterima. Baca berita selengkapnya…
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