Emas ditemukan di rumah pegawai Ram Mandir, Tinnu: Keponakan penanggung jawab konstruksi juga ada dalam radar, biasa mengambil karung dengan kereta api dan kembali dengan pesawat.
📖 Sumber artikel — 🇮🇳 Hindiअयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से दो दिन पहले यानी शनिवार को सोना मिला। ट्रस्ट की टीम पुलिस के साथ उनके घर पहुंची थी। ट्रस्ट की जांच टीम ने गोपनीय तरीके से यह कार्रवाई की। इस मामले में ट्रस्ट और पुलिस का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि, सोना कितना है, यह अभी कन्फर्म नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इसकी कीमत करोड़ों में है। टिन्नू को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता है। ट्रस्ट में वह काफी पावरफुल हैं। चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में जमा कराना हो, वही सब कुछ मैनेज करते हैं। इधर, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के रिश्ते में भतीजे लगने वाले सोमेश आनंद भी शक के घेरे में हैं। सूत्रों के मुताबिक, सोमेश आनंद ने एक साल में 50 से ज्यादा यात्राएं की हैं। इनमें कर्नाटक समेत कई राज्य शामिल हैं। खास बात यह है कि सोमेश बोरे में लगेज लेकर अयोध्या से ट्रेन से जाते थे और वापसी फ्लाइट से खाली हाथ करते थे। बोरे में क्या होता था, इसे अलग-अलग चर्चाएं हैं। यह भी दावा है कि वह पैसा और सामान लेकर ट्रेन से जाते थे, क्योंकि ट्रेन में चेकिंग कम होती है। गोपाल राव कर्नाटक के रहने वाले हैं। सोमेश आनंद भी वहीं के हैं। 2023 में मंदिर निर्माण प्रभारी बनने के बाद गोपाल राव ने सोमेश की नौकरी मंदिर में लगवाई थी। 6 लोगों की टीम टिन्नू के घर पहुंची, सोना मिला रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां सामने आई हैं। उसका पुश्तैनी मकान राम मंदिर से 1.5 किमी दूर स्वर्गद्वार इलाके में है। वहां इस वक्त उनके भाई रहते हैं। इसी घर में 13 जून को ट्रस्ट और मंदिर सुरक्षा से जुड़े 6 लोगों की टीम पहुंची। टिन्नू के घर से सोना बरामद कर टीम अपने साथ ले गई। टिन्नू 1992 में अयोध्या में ऑटो चलाता था। खुद एक बाइक से चलता था। उसके पड़ोसियों ने बताया कि टिन्नू का अयोध्या एयरपोर्ट के पास एक मकान है, जिसमें हॉस्टल चलता है। इसमें करीब 70 कमरे हैं। माना जा रहा कि जल्द ही ट्रस्ट और सुरक्षा से जुड़े लोग हॉस्टल में भी सर्च कर सकते हैं। टिन्नू अभी राम मंदिर परिसर के ही PCF यात्री सुविधा केंद्र में है। यहीं उससे पूछताछ चल रही है। मंदिर कर्मचारी केडी तिवारी के घर भी छापेमारी हुई मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोने-चांदी के जेवरों को संभालने की जिम्मेदारी केडी तिवारी की है। वह भी संदेह के घेरे में हैं। PCF यात्री सुविधा केंद्र में ट्रस्ट की जांच टीम ने उनसे भी पूछताछ की थी। 2 दिन पहले इनके घर भी ट्रस्ट और सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने छापेमारी की। हालांकि, इनके घर से टीम को क्या मिला, यह अभी साफ नहीं है। केडी तिवारी ने 1. 5 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है, जो जांच के दायरे में है। केडी तिवारी ने भास्कर से कहा था- मेरी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दान किए गए सोने-चांदी के गहनों को तौलकर दानदाता को रसीद देने की थी। फिर उन गहनों को ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों तक सुरक्षित पहुंचा देता था। इसके आगे गहनों के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह मुझे नहीं पता है। सोमेश और टिन्नू के कामों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता था सूत्रों के अनुसार, रामलला के दान से चोरी की रकम का बंटवारा अयोध्या में निर्मला हॉस्पिटल के पास एक मकान में होता था। पिछले करीब 3 साल से रामलला के दान के लेखा प्रभारी हरीश श्रीवास्तव भी ट्रस्ट और सुरक्षा अधिकारियों के रडार पर है। चंपत राय का सहयोगी टिन्नू और गोपाल राव के करीबी सोमेश आनंद इतने प्रभावशाली थे कि इनके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं कर पाता था। इनके लिए बाकायदा निर्देश दिए गए थे। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने करीब 50 रिटायर शिक्षकों को अपनी सेवा में ले रखा है। इन पर भी नजर रखी जा रही है। दो साल पहले रामलला और तीनों भाइयों के सोने के मुकुट गायब हुए थे हर साल सावन के झूला मेले के समय भगवान राम का उनके तीनों भाइयों- भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के साथ विशेष श्रृंगार कराया जाता है। परंपरा के अनुसार, झूलन उत्सव पर चारों भाइयों को सोने के मुकुट पहनाए जाते हैं। फिर उन्हें झूले पर विराजमान कर भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। 2 साल पहले की बात है, रामलला और उनके तीनों भाइयों के सोने के मुकुट गायब हो गए। कई महीनों तक मुकुट का पता नहीं चला। सावन मेले के दौरान जब रामलला के पुजारियों ने बार-बार मुकुट की मांग की तो खोजबीन शुरू हुई। तलाशी में मंदिर परिसर में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की अलमारी से मुकुट मिले थे। सूत्रों के अनुसार, ये मुकुट गाजियाबाद के एक श्रद्धालु ने अपनी मां के जेवर बेचकर रामलला को भेंट किए थे। पहले दान पात्र के सोने-चांदी के आभूषण चुराए, फिर कैश चोरी बहुत से श्रद्धालु सोने-चांदी के जेवर दानपात्र में ही डाल देते थे। सूत्रों के अनुसार, इसका लोखा-जोखा भी ठीक से तैयार नहीं होता। दानपात्र से केवल कैश की गिनती होती रही। सोने-चांदी जैसी धातुओं का उल्लेख न के बराबर ही किया जाता रहा। रामलला को चढ़ावे में आने वाले सोने-चांदी में उन्हीं का लेखा-जोखा तैयार होता रहा, जो ट्रस्ट कार्यालय में ही जमा किए जाते रहे। जबकि, भीड़ के दौरान आम श्रद्धालुओं की पहुंच इस कार्यालय तक नहीं हो पाती थी। सूत्रों के अनुसार, रामलला के दानपात्र से कैश से ज्यादा सोने, चांदी आदि धातुओं की चोरी की जाती रही। पहले धातुओं को चुराया गया, फिर कैश पर भी हाथ साफ किया जाने लगा। ये 4 लोग जांच के दायरे में ----------------------- ये खबर भी पढ़िए- राम मंदिर से क्या 200 करोड़ का चढ़ावा चोरी हुआ, 50 कर्मचारी रडार पर, कई 5 साल में करोड़पति हुए अयोध्या के राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी ने सबको चौंका दिया है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, यह चोरी 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो सकती है। नोटों की गिनती से जुड़े करीब 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक 5 कर्मचारियों से करीब 2 करोड़ रुपए की नकदी, एक कार और 3 आईफोन बरामद किए हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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