एक सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन से पता चलता है कि लू के दौरान उत्तर भारत में सतही ओजोन 85-110 μg/m³ तक पहुंच जाती है और देश के हर क्षेत्र में WHO के दिशानिर्देश 70 μg/m³ से अधिक हो जाती है। 2024 में लू के दौरान पिछले दिनों की तुलना में लगभग 830 अधिक मौतें हुईं।