ईडी का आरोप है कि शैक्षणिक संस्थानों ने अयोग्य, गैर-वास्तविक और गैर-सत्यापन योग्य छात्रों को लाभार्थियों के रूप में दिखाकर उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी छात्रवृत्ति धनराशि को धोखाधड़ी से प्राप्त किया।