पूर्व मंत्री और कलात्मक निदेशक बताते हैं कि "स्थानीय गौरव" को बढ़ावा देकर और "बिना दबंग हुए" निवासियों के जीवन में सांस्कृतिक गतिविधियों को शामिल करना कैसे संभव है।