खाद्य एवं औषधि संगठन के प्रमुख के बयानों से पता चलता है कि हाल के महीनों में दवा की कमी कोई अचानक आया संकट नहीं है, बल्कि मुद्रा आवंटन में देरी और पिछली चेतावनियों की अनदेखी का नतीजा है; एक मुद्दा जो एक बार फिर स्वास्थ्य संकट के निर्माण में वित्तीय निर्णयों की भूमिका पर जोर देता है।