किसी भी समझौते की सफलता बैठकों और बयानों की संख्या से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने की मात्रा से मापी जाएगी। यदि भविष्य का समझौता ईरान के आर्थिक, सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों की गारंटी दे सकता है, तो यह तनाव कम करने के लिए एक प्रारंभिक बिंदु बन सकता है। लेकिन अगर इन गारंटियों को नजरअंदाज किया गया तो अतीत के महंगे अनुभवों को दोहराने का जोखिम बना रहेगा