समकालीन दुनिया में उपभोक्तावाद न केवल एक साधारण आर्थिक व्यवहार है, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक प्रतिमान बन गया है जो मानव जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित करता है।