Премьер-министр Моди прибыл в Словакию, его встретили хлебом и солью: премьер-министр Индии приезжает сюда впервые; Сегодня мы встретимся с президентом и премьер-министром.
📖 Источник статьи — 🇮🇳 Хиндиप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो देशों के दौरे के दूसरे फेज में रविवार रात 2:18 बजे स्लोवाकिया पहुंचे। वह यहां 16 जून तक हैं। राजधानी ब्रातिस्लावा में विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराय ब्लानार ने उनका स्वागत किया। ब्लानार ने मोदी को पारंपरिक स्लोवाक रीति से ब्रेड और नमक भेंट किया गया, जिसे यहां आतिथ्य, सम्मान और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है। मोदी ने एयरपोर्ट पर स्लोवाकिया में मौजूद भारतीयों से भी मुलाकात की। स्लोवाकिया 1993 में आजाद हुआ था। उसके 33 साल के इतिहास में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। मोदी आज स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात करेंगे। मोदी फ्रांस के नीस शहर से स्लोवाकिया पहुंचे हैं। इससे पहले रविवार को उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और भारत इनोवेट्स कार्यक्रम के उद्घाटन में भी हिस्सा लिया था। दरअसल, मोदी 13 जून से फ्रांस-स्लोवाकिया के 6 दिन के दौरे पर हैं। वे 17 जून को फ्रांस के एवियान में G7 समिट में शामिल होंगे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मिलेंगे। ब्रातिस्लावा में मोदी के स्वागत की 3 तस्वीरें… स्लोवाकिया में 9 हजार से ज्यादा भारतीय स्लोवाकिया में 9,200 से ज्यादा भारतीय रहते हैं। स्लोवाकिया में भारतीय आईटी सेवाओं, डेवलपमेंट सेंटर्स और तकनीकी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। स्लोवाकिया के शेंगेन (यूरोपी देशों का समूह जहां एस वीजा से एंट्री मिलती है) देश होने की वजह से भारतीयों को एक ही वीजा पर 26 देश घूमने की सुविधा मिलती है। 2025 में भारत-स्लोवाकिया के बीच ₹17 हजार करोड़ का व्यापार मोदी-मैक्रों की द्विपक्षीय बैठक, 13 बड़े समझौते हुए रविवार को फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में रक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी, स्पेस और शिक्षा पर बात हुई। दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल सिस्टम और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग की शुरुआत की है। इससे पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ प्रोग्राम का उद्घाटन किया, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल फंड्स ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के पास स्थित विला केरीलोस घुमाने ले गए। यह फ्रांस की प्रसिद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। मैक्रों ने यहां पीएम के साथ सेल्फी ली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इनोवेशन प्रोग्राम में PM बोले- दोनों देशों का विजन एक, 5 बड़ी बातें मैक्रों बोले- दुनिया भारत के साथ इनोवेशन करना चाहती है, 5 बड़ी बातें फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील पर चर्चा भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बैठक में राफेल के मुद्दे पर खास चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ध्यान 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने पर है। भारत चाहता है कि डिफेंस प्रोजेक्ट्स में डिजाइनिंग से लेकर विमान बनाने तक का सारा काम दोनों देश मिलकर करें। इनमें सबसे अहम वायु सेना के लिए 114 रफाल की डील है। करीब सवा 3 लाख कराेड़ रुपए के इस सौदे में भारत विमानों के साझा विकास और उत्पादन के अलावा टेक्नोलॉजी का पूरा ट्रांसफर चाहता है। जरूरतों के हिसाब से इन विमानों पर मिसाइलें और अन्य हथियार लगाने के लिए सोर्स कोड को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट करेगा। मोदी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) ने अभी तक इस डील पर मुहर नहीं लगाई है। भारत और फ्रांस बना सकते हैं एआई का ओपन सोर्स मॉडल अभी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दो बड़े मॉडल हैं। पहला- अमेरिकी, जो पूरी तरह से निजी कॉर्पोरेट्स के मुनाफे पर टिका है और दूसरा चीनी, जो सरकारी नियंत्रण पर आधारित है। लेकिन, भारत और फ्रांस दुनिया को तीसरा यानी ओपन सोर्स मॉडल देने की तैयारी में हैं। मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक भारत को दुनिया एक 'टेक्नोलॉजी अडॉप्टर' मानती थी, लेकिन आज भारत 'टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर' (समाधान देने वाला) बन चुका है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को बताते हुए कहा कि 1. 4 अरब की आबादी वाला यह देश हर साल 10 लाख से ज्यादा इंजीनियर तैयार करता है, जो पूरे यूरोप और अमेरिका को मिलाकर बराबर हैं। PM का फ्रांस दौरा, 5 तस्वीरें… G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की 'मॉडर्न इकोनॉमी' वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉ м, при этом политические вопросы также важны для G7. Помимо стран «Большой семерки», страны БРИКС также входят в «Большую двадцатку», образованную в 1999 году. Помимо Индии, в эти страны входят Аргентина, Австралия, Бразилия, Китай, Индонезия, Мексика, Россия, Саудовская Аравия, Южная Африка, Южная Корея, Турция и Европейский Союз. По словам Раджана Кумара, в G20 также вошли страны с новой и растущей экономикой. Несмотря на схожесть повесток дня «Большой семерки» и «Большой двадцатки», в настоящее время «Большая двадцатка» является более эффективной группой. В 2020 году президент США Трамп также назвал G7 очень устаревшей группой. ……………………
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