जहां सरकारी विमर्श से जाति शब्द गायब हो जाता है, वहीं चीफ ऑफ स्टाफ अपने ही शब्दों और विरोधाभासों में किस हद तक उलझ जाता है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है।