सूत्रों का दावा है कि ज़ायोनी शासन के प्रधान मंत्री ने यह कार्रवाई यह सोचकर की थी कि दहिया पर हमले से ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच वार्ता बाधित हो सकती है।