सीएनएन के एक विश्लेषण में माना गया कि वाशिंगटन के साथ किसी भी समझौते के लिए ईरान में कट्टरपंथी आंदोलन के विरोध के बढ़ने से वार्ता के दौरान दबाव बढ़ सकता है, लेकिन अगर वह समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला करता है तो इससे शासन की स्थिति में बदलाव की संभावना नहीं है।