द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के 80 साल बाद तक ऐसा नहीं हुआ था कि नाजी उत्पीड़न के पीड़ितों की फांसी की फाइलों में पाए गए पत्र अंततः उनके प्रियजनों द्वारा पढ़े गए थे। म्यूनिख अभिलेखागार द्वारा संरक्षित, उन्हें कभी भी परिवारों को वापस नहीं किया गया। कुछ को जर्मनी में गिरफ्तार किये गये और फाँसी दिये गये फ्रांसीसी लोगों द्वारा लिखा गया था।