अपनी विशाल तेल संपदा और ऊर्जा संसाधनों के बावजूद, कुछ तेल उत्पादक देशों को बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जो वर्ष 2026 के दौरान मुद्रास्फीति दरों में दिखाई देंगी।