शहर के सार्वजनिक स्थान हमेशा व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक पाठन का मिलन स्थल रहे हैं; जहां लोगों के नैरेटिव और विश्लेषकों के नैरेटिव कभी एक-दूसरे के करीब होते हैं तो कभी एक-दूसरे से दूर होते हैं।