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Sayoni fue destituida de la presidencia del ala juvenil de TMC: Mamta había dado el puesto hace 7 días considerando que sus leales y cercanos dijeron: los que fueron alimentados con leche resultaron ser serpientes

Sayoni fue destituida de la presidencia del ala juvenil de TMC: Mamta había dado el puesto hace 7 días considerando que sus leales y cercanos dijeron: los que fueron alimentados con leche resultaron ser serpientes

Internacional 14/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 16
⚡ Resumen rápido

ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस यानी TMC पार्टी में 7 दिन के अंदर दो बार संगठनात्मक बदलाव किए। सांसद सायोनी घोष को पार्टी की यूथ विंग के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। उनकी जगह युवा नेता अण्रब बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही ममता ने सांसद माला रॉय को महिला मोर्चा के अध्यक्ष पद से हटा दिया। माला रॉय की जगह नादिया जिले के कालिगंज से टीएमसी विधायक अलीफा अहमद को अध्यक्ष नियुक्त किया है। दरअसल 3 जून को 58 विधायकों के अलग गुट बनाने के बाद ममता ने पार्टी की सभी कमेटियां भंग कर दी थीं। 5 जून को उन्होंने मीटिंग करके वफादार मानी जाने वालीं सायोनी और माला को नई जिम्मेदारी सौंपी थी। 8 जून को 20 सांसदों का बागी गुट सामने आ गया। जिसमें सायोनी घोष और माला रॉय भी शामिल हैं। इसके बाद ममता ने 12 जून को मीटिंग करके दोनों महिला सांसदों को पद से हटा दिया। ममता की हार के 14 दिन बाद टूटी TMC ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस(TMC) में फूट अब तय है। विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों के बगावत के बाद लोकसभा के बागी 19 सांसदों का लेटर शुक्रवार को सामने आया। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक इसे 18 मई को लोकसभा स्पीकर को भेजा गया था और अलग गुट बनाने की मांग की गई है। इससे साफ है कि ममता की हार के 14 दिन बाद ही पार्टी में बगावत शुरू हो गई थी। इस चिठ्ठी में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। एक नाम सामने नहीं आया है। इससे पहले 3 जून को TMC के58 विधायकों ने बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनके गुट को मान्यता देने की मांग की थी, जिसे अध्यक्ष ने मंजूर भी कर लिया था। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, TMC के बागी गुट के नेता रविवार को दिल्ली में CM शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में मीटिंग करेंगे। वे सोमवार को स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे। लेटर का सिर्फ साइन वाला हिस्सा सामने आया 19 बागी लोकसभा सांसदों के नाम… राजनीतिक पार्टी का अलग गुट बनाने का नियम दल-बदल कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अलग गुट को मान्यता तभी मिलती है। जब पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद उसके साथ हों। TMC के मामले में अभी यह स्थिति है… विधानसभा में ममता के 80 विधायकों में से 58 अलग हो चुके हैं। यानी बागी गुट के पास दो-तिहाई समर्थन है। लोकसभा में लोकसभा में 28 में से 20 सांसद बगावत कर चुके हैं। यानी यहां भी बागी गुट के पास दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत है। दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय कर सकते हैं या अलग गुट बनाकर उसकी मान्यता मांग सकते हैं। अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति लेते हैं। हालांकि ममता गुट इस पूरे मामले को कोर्ट में चुनौती दे सकता है। बंगाल में महाराष्ट्र जैसी बगावत, 4 साल पहले उद्धव को खोनी पड़ी थी शिवसेना 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए। फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। 4 दिन में 4 राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे चुके हैं TMC के लोकसभा सांसदों के अलावा राज्यसभा सांसद भी टूट रहे हैं। पिछले 4 दिनों में चार राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। 8 जून को सुखेंदु शेखर ने सदस्यता के साथ पार्टी छोड़ी। फिर 10 जून को सुष्मिता देव अलग हो गईं। 11 जून को प्रकाश चिक और कोयल मलिक ने इस्तीफा दे दिया। TMC सांसद कीर्ति आजाद बोले- यह सबकुछ भाजपा की चाल है TMC सांसद कीर्ति आजाद ने शुक्रवार को कहा- बागी सांसदों के घर BJP के लोग बैठे थे। पुलिस बाहर पहरा दे रही थी। उनके घर तोड़ दिए गए। उनके परिवारों को डराया-धम काया गया। कई लोग डर के मारे सामने आए। आप देख सकते हैं कि पहले 8 नाम अलग स्याही से लिखे हैं, जबकि अगला ग्रुप काली स्याही से लिखा है। उस ग्रुप में तीन मुस्लिम भी शामिल हैं। सायोनी ने अलग से साइन किया। वह खुलकर नहीं मिलीं, लेकिन अलग से साइन किया। वह भूपेंद्र यादव से मिली थीं। यह सब निशिकांत दुबे के घर से प्लान किया जा रहा है। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे। दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है। संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है। ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है। नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है। INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी?

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