मनोविज्ञान कहता है कि जो लोग बुढ़ापे तक स्पष्ट और व्यावहारिक बने रहते हैं, उनमें एक आदत हो सकती है: वे दुनिया को बाहर से देखने के बजाय उसमें भाग लेना जारी रखते हैं।
📖 लेख स्रोत — 🇪🇸 स्पेनिशबुढ़ापे में स्पष्टता केवल समय बीतने या अलग-अलग कारकों पर नहीं, बल्कि कुछ आदतों पर निर्भर हो सकती है।
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