ایالت شمال شرقی میزورام در حال تبدیل شدن به یک پایگاه مواد مخدر است: تحویل مستقیم مواد مخدر از میانمار به خانه، حدود 4000 کیلوگرم مواد مخدر در 3 سال کشف و ضبط شد.
فناوری13/06/2026Dainik Bhaskar
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⚡ خلاصه سریع
रात के करीब साढ़े 11 बजे हैं। मिजोरम की राजधानी आइजोल में पारा गिर रहा है और सड़कें लगभग सुनसान हैं। लेकिन, इस सन्नाटे में साधारण कपड़े पहने कुछ युवक हाथों में टॉर्च और लकड़ी के डंडे लिए नजर आए। पूछने पर पता चला कि ये पुलिस नहीं, बल्कि ‘यंग मिजो एसोसिएशन’ (वाईएमए) के वॉलेंटियर्स हैं, जो सूबे की रगों में घोले जा रहे म्यांमार के सिंथेटिक ड्रग्स ‘आइस’ से अगली पीढ़ी को बचाने के लिए पहरा दे रहे हैं। मिजोरम इस समय अपने इतिहास के सबसे भयावह नशा संकट से जूझ रहा है। म्यांमार की 500 किमी लंबी खुली सीमा से आने वाले खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बिखेर दिया है। पिछले साल इस ड्रग्स ने 118 तो इस साल अब तक 21 जानें ले ली हैं। म्यांमार सीमा से सटा चंफाई जिला इसका मुख्य कॉरिडोर है। बीते 3 साल में यहां से करीब 4 हजार किलो ड्रग्स जब्त हुई। भास्कर ने लगभग 200 किमी घूमकर इस नेटवर्क को करीब से जाना। चैट ग्रुप का स्क्रीन शॉट दिखाने से ही मिल जाती है ड्रग्स चौंकाने वाली बात यह है कि पूरा कारोबार डिजिटली हो रहा है। ड्रग्स सप्लायर वॉट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सीक्रेट ग्रुप्स बनाकर नेटवर्क चला रहे हैं। सिर्फ चैट ग्रुप का स्क्रीन शॉट दिखाकर आसानी से ड्रग्स मिल जाती है। भास्कर ने जब वाईएमए के मेंबर से कुछ स्क्रीन शॉट मांगे तो उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से इन्हें देने से मना कर दिया। मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग के संयुक्त आयुक्त पीटर जोहमिंगथांगा ने बताया कि स्थानीय नेटवर्क में ‘आइस’ और ‘कैंडी’ जैसे कोड वर्ड्स से ड्रग्स बेचा जा रहा है। डेढ़ महीने में आइजोल में ही 239 मरीज सामने आए पिछले महीनों में ड्रग्स की होम डिलीवरी भी हो रही है। आइजोल स्थित सामाजिक कार्यकर्ता एलिन लालावनिपुई हमें उन मरीजों के पास ले गईं, जो सिंथेटिक ड्रग्स के शिकार हुए। उन्होंने बताया कि मैंने इस साल 10 अप्रैल से 28 मई के बीच केवल आइजोल में 239 मरीज दर्ज किए हैं। इतने कम समय में इतने मरीज मिलना स्थिति की भयावहता को दिखाता है। इनमें से ज्यादातर लोग पहले शराब और गांजा पीते थे, लेकिन अब खतरनाक ड्रग्स ले रहे हैं। मैं अभी बॉर्डर पर बसे चंफाई जिले में हूं। वाईएमए की सेंट्रल कमेटी के महासचिव प्रो.
रात के करीब साढ़े 11 बजे हैं। मिजोरम की राजधानी आइजोल में पारा गिर रहा है और सड़कें लगभग सुनसान हैं। लेकिन, इस सन्नाटे में साधारण कपड़े पहने कुछ युवक हाथों में टॉर्च और लकड़ी के डंडे लिए नजर आए। पूछने पर पता चला कि ये पुलिस नहीं, बल्कि ‘यंग मिजो एसोसिएशन’ (वाईएमए) के वॉलेंटियर्स हैं, जो सूबे की रगों में घोले जा रहे म्यांमार के सिंथेटिक ड्रग्स ‘आइस’ से अगली पीढ़ी को बचाने के लिए पहरा दे रहे हैं। मिजोरम इस समय अपने इतिहास के सबसे भयावह नशा संकट से जूझ रहा है। म्यांमार की 500 किमी लंबी खुली सीमा से आने वाले खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बिखेर दिया है। पिछले साल इस ड्रग्स ने 118 तो इस साल अब तक 21 जानें ले ली हैं। म्यांमार सीमा से सटा चंफाई जिला इसका मुख्य कॉरिडोर है। बीते 3 साल में यहां से करीब 4 हजार किलो ड्रग्स जब्त हुई। भास्कर ने लगभग 200 किमी घूमकर इस नेटवर्क को करीब से जाना। चैट ग्रुप का स्क्रीन शॉट दिखाने से ही मिल जाती है ड्रग्स चौंकाने वाली बात यह है कि पूरा कारोबार डिजिटली हो रहा है। ड्रग्स सप्लायर वॉट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सीक्रेट ग्रुप्स बनाकर नेटवर्क चला रहे हैं। सिर्फ चैट ग्रुप का स्क्रीन शॉट दिखाकर आसानी से ड्रग्स मिल जाती है। भास्कर ने जब वाईएमए के मेंबर से कुछ स्क्रीन शॉट मांगे तो उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से इन्हें देने से मना कर दिया। मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग के संयुक्त आयुक्त पीटर जोहमिंगथांगा ने बताया कि स्थानीय नेटवर्क में ‘आइस’ और ‘कैंडी’ जैसे कोड वर्ड्स से ड्रग्स बेचा जा रहा है। डेढ़ महीने में आइजोल में ही 239 मरीज सामने आए पिछले महीनों में ड्रग्स की होम डिलीवरी भी हो रही है। आइजोल स्थित सामाजिक कार्यकर्ता एलिन लालावनिपुई हमें उन मरीजों के पास ले गईं, जो सिंथेटिक ड्रग्स के शिकार हुए। उन्होंने बताया कि मैंने इस साल 10 अप्रैल से 28 मई के बीच केवल आइजोल में 239 मरीज दर्ज किए हैं। इतने कम समय में इतने मरीज मिलना स्थिति की भयावहता को दिखाता है। इनमें से ज्यादातर लोग पहले शराब और गांजा पीते थे, लेकिन अब खतरनाक ड्रग्स ले रहे हैं। मैं अभी बॉर्डर पर बसे चंफाई जिले में हूं। वाईएमए की सेंट्रल कमेटी के महासचिव प्रो. मालसॉमलियाना भी साथ में हैं। मालसॉमलियाना ने हमें बॉर्डर के वो इलाके भी दिखाए, जहां से म्यांमार से ड्रग्स मिजोरम में आती है। इन्होंने बताया कि यहां सीमा के पार म्यांमार का रिहखावदार इलाका है, जहां दोनों ओर के लोगों के पारिवारिक संबंध हैं। इसी आवाजाही की आड़ में रात के अंधेरे में छोटे कैरियर (पेडलर्स) घने जंगलों और पहाड़ी पगडंडियों से ड्रग्स की खेप भारत लाते हैं। यहां से ड्रग्स देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ बांग्लादेश और अरब देशों तक जा रही है। करीब 5 लाख वॉलेंटियर्स ‘ऑपरेशन जेरिको’ चला रहे सबसे बड़ी बात है कि इस सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ मिजोरम के लोग खुद जंग लड़ रहे हैं। प्रो. मालसॉमलियाना ने बताया कि जब सरकारी तंत्र बेबस दिखने लगा, तो मिजो समाज की सदियों पुरानी परंपरा “Tlawmngaihna” (निस्वार्थ सेवा की भावना) जाग उठी। चर्च, स्थानीय समुदाय और 5 लाख वॉलेंटियर्स वाले संगठन वाईएमए ने खुद मोर्चा संभाल लिया। हमने सितंबर 2025 में पुलिस और नारकोटिक्स विभाग के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन जेरिको’ शुरू किया। चंफाई के 13 संवेदनशील गांवों में हमारे वॉलेंटियर्स तैनात हैं। हमारा खुफिया नेटवर्क जैसे ही इनपुट देता है, हम पुलिस के साथ मिलकर रेड करते हैं। हमारा काम पीड़ितों को बचाना और उन्हें रिहैब (नशामुक्ति केंद्र) तक पहुंचाना है। अब मणिपुर रूट का इस्तेमाल कर रहे म्यांमारी तस्कर वाईएमए के केंद्रीय अध्यक्ष आर. लालंघेता ने बताया कि ऑपरेशन जेरिको असर दिखाने लगा तो तस्कारों ने ड्रग्स लाने के लिए पारंपरिक रास्तों को बंद कर दिया। अब नशा तस्कर मणिपुर रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले म्यांमार से मणिपुर में एंट्री होती है और वहां से ड्रग्स मिजोरम और दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जा रहा है। ------------ ये खबर भी पढ़ें... ड्रग्स के खिलाफ भारत-म्यांमार बॉर्डर पर पहली बार ED रेड:गुजरात से कच्चा माल जाता था; प्रवर्तन निदेशालय ने (ED) गुरुवार को ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिजोरम में भारत-म्यांमार बॉर्डर पर पहली बार छापेमारी की। एजेंसी ने मिजोरम के चंफाई, आइजोल में तलाशी ली। इसके अलावा असम के करीमगंज जिले के श्रीभूमि और गुजरात के अहमदाबाद में भी छापा मारा। पूरी खबर पढ़ें…