भाषाविद् एलेन बेंटोलिला ने "ले मोंडे" के एक कॉलम में आशंका जताई है कि बातचीत करने वाले एजेंट हमें लिखने का स्वाद खो देंगे और भाषा के हानिकारक मानकीकरण में योगदान देंगे। वह इस क्षेत्र में महत्वाकांक्षी शैक्षिक नीतियों की वकालत करते हैं।