यदि नई तकनीकों के सामने दिमाग की क्षमताओं के कमजोर होने का डर कोई नई बात नहीं है, तो डिजिटल क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता किताबी सभ्यता के अंत का संकेत देती है।