TMC के सांसद कल्याण ने शनिवार को कहा कि अभिषेक बनर्जी मेरे बेटे जैसा है और बेटे की सभी गलतियों को माफ करना पिता का काम होता है। इससे पहले उन्होंने 11 जून को उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी को मुझे या अभिषेक में से किसी एक को चुनना होगा। दरअसल, गुरुवार को अभिषेक ने फर्जी साइन मामले में अपने अपना वकील बदल लिया था। पहले कल्याण इस केस में अभिषेक के वकील थे। इसके बाद कल्याण ने कहा था कि अभिषेक को सीनियर नेताओं का सम्मान करना नहीं आता। वे बहुत अहंकारी हैं। इसी वजह से पार्टी बर्बाद हुई है। शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी ने भी कहा कि कल्याण बनर्जी मुझसे बड़े हैं। उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने मुझे बचपन से देखा है, इसलिए मैं उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा। कल्याण बनर्जी ने कहा- पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खत्म होचुका है कल्याण बनर्जी ने टीएमसी में हो रहा टूट पर कहा कि बागियों बीजेपी की शरण में ही जाना होगा। उन्होंने कहा कि यह सब एक चाल है। ये लोग अपने क्षेत्रों के विकास का बहाना बनाते हैं, लेकिन जो लोग अपने क्षेत्र में जा तक नहीं सकते, वे क्या काम करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खत्म हो चुका है। मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद भी पिछले एक महीने में क्या विकास हुआ है? बीजेपी और पुलिस हमें परेशान कर रही है। पश्चिम बंगाल में किसी भी विपक्ष ने कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया है, जैसी हम कर रहे हैं। कल्याण बनर्जी ने टीएमसी और कांग्रेस के आपस में विलय (मर्जर) की खबरों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि हम कांग्रेस के साथ कोई विलय नहीं कर रहे हैं। बंगाल में महाराष्ट्र जैसी बगावत, 4 साल पहले उद्धव को खोनी पड़ी थी शिवसेना ममता बनर्जी की टीएमसी में 3 जून को टूट शुरु हुई थी। 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अगल गुट बना लिया था। इसके बाद 8 जून को पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष ने दावा किया था की उनके पास 20 टीएमसी सांसदों का समर्थन है। इससे पहले ऐसी ही टूट महाराष्ट्र में देखने को मिली थी। 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए। फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया। TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे। दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है। संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है। ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है। नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है। INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी? आने वाले दिनों में असली लड़ाई सिर्फ विधायकों की संख्या की नहीं, बल्कि पार्टी के नाम, संगठन और राजनीतिक विरासत की होगी। ------------------------------ ये खबर भी पढे़ं… TMC नेता जहांगीर खान नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार: अवैध वसूली का आरोप पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने सोमवार को TMC नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी नेपाल बॉर्डर के पास से हुई। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फालता पुलिस स्टेशन में खान के खिलाफ 7 FIR की गई थीं। पूरी ख Leer más…