तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित समझौते से संघर्ष का समाधान नहीं होगा, बल्कि तनाव बढ़ने के दबाव में बातचीत शुरू होगी और ईरान की क्षेत्रीय स्थिति के स्थिरीकरण के खिलाफ अमेरिका की मांगों में गिरावट और इजरायल के अलगाव का पता चलेगा।