नए शोध से पता चलता है कि पारंपरिक शुक्राणु परीक्षण अब पर्याप्त नहीं हैं, और शुक्राणु कोशिकाओं के कार्य और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर विस्तृत जानकारी के संयोजन से पुरुष बांझपन का बेहतर निदान हो सकता है।